Saturday, January 4, 2014

सपने कहाँ गये ?

I am writing this blog after reading a book “सपने कहाँ गये ? ‘’ by a great hindi sahitya writer “Vidya Niwas Mishra”.

I am going to share some of his lines about the situation of country and our dreams.

Before 1947, there was a big impact of Hindi Sahitya on us. He described the thoughts of people by a poem “मैने आहुति बनकर देखा” created by “अज्ञेय जी” :

‘काँटा कठोर है, तीखा है उसमे उसकी मर्यादा है

मै कब कहता हूँ वह घटकर प्रातंर का फूल बने । '

Later in this book he has written about current situation of India :

‘…. .. राजनीतिक मंच पर जो कुछ घटित हुआ है उसका कारण केवल राजनेता नही है । राजनेताओ को चुनने वाले और उन्हे, राजनेता है सिर्फ  इसलिये सम्मान देने वाले भी सभी लोग है । …

… राजनीति पूजा का सबसे बुरा प्रभाव शिक्षा पर पड़ा और शिक्षा  जिस  बिन्दू पर पहुँची है  उसके बारे मे कुछ भी कहने की आवश्यकता नही है । प्राथमिक शिक्षा केवल नक्शे मे है और माध्यमिक शिक्षा केवल आँकड़ो मे है । उच्च शिक्षा एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहाँ पर गाड़ी मे बैठने  की जगह की प्रतीक्षा करते- करते  लोग इतने उब जाते है कि खोमचे लुटने लग जाते हैं।  प्लेटफार्म एक – दो घण्टे की प्रतीक्षा की जगह होती है, पूरी जिंदगी प्रतीक्षा के लिए नहीं । पर शिक्षा नीति की  उद्घोषणा के बावजूद  शिक्षा राजनीतिक रमझल्ले का शिकार हुई है । और शिक्षा संस्थाएँ, उनके पुस्तकालय, उनके खेलने का मैदान, उनके पढने – पढाने की जगह – सब एक मेले का परिवेश उपस्थित करते हैं, जहाँ अपना ही शब्द सुनाई नही पड़ता । मै यह नही कहता कि इसका दोष केवल राजनीति का है ।

            पर राजनीति ही तो व्यवस्था देती है । और यदि राजनीति स्वयं अव्यवस्थाओं के बीच चलती रही तो उसे व्यवस्था के बारे में सोचने की फुर्सत कहाँ ! यही स्वाधीनीता के बाद की सबसे बड़ी त्रासदी रही है । ..’

He mentioned about solutions :

‘देश के साधारण लोगो तुम क्यो दूसरो के चलाये-दिखाये पर चलते और देखते  हो । इन गलत चाल सिखाने वालों को तुम सीधे नकार क्यों नही देते ।

      यह काम देश मे आरम्भ होना चाहिये । किसीको तो आरम्भ करना चाहिये । यों देखने मे यह काम असंभव लगता है, पर जहाँ संभावनाये इतनी चुक गई है, वहाँ शुरूआत तो असंभव से ही होगी ।’

He , Vidya Niwas Mishra , has written this book  in 1998 but I still find his lines very correct. What do you think? Please comments or share if you are agree.

1 comment:

  1. I think india is on path of higher education revolution....todays peoples are interested in higher education, quality of basic education needed to be improve.
    last line of the blog is impressive, for country welfare hme aage aana hoga, sirf politician hi nhi hum v doshi hai.

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